Sunday, November 27

Coronavirus Vaccine: कहां तक पहुंचा ट्रायल, आखिर भारत में कब आएगी वैक्सीन?

भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने अगले साल की शुरुआत तक कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध होने की उम्मीद जताई है। डॉक्टर हर्षवर्धन ने राज्य सभा में साथ ही कहा, ‘वैक्सीन कोई जादू नहीं हैं, बड़े पैमाने पर वैक्सीन के उपलब्ध होने के लिए वक्त लगेगा, लेकिन कोरोना वायरस को रोकने के लिए मास्क सबसे महत्वपूर्ण है।’ इससे एक दिन पहले भारत की फ़ार्मा कंपनी डॉक्टर रेड्डीज लैब्स ने कहा था कि भारत को इस साल के आखिर तक कोरोना वायरस की वैक्सीन मिल सकती है। कंपनी ने रूस के साथ रूसी वैक्सीन स्पुतनिक V के 10 करोड़ डोज़ खरीदने का करार किया है। 

वहीं दूसरी तरफ ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन बना रही एस्ट्राजेनिका के भारतीय पार्टनर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल्स फिर शुरू करने की अनुमति मिल गई है। ट्रायल के दौरान एक व्यक्ति के शरीर में हुए कथित साइड इफेक्ट के बाद इसका ट्रायल रोक दिया गया था, लेकिन अब कुछ शर्तों के साथ ट्रायल फिर से शुरू करने की इजाजत दे दी गई है।



दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का कुल आंकड़ा तीन करोड़ के नजदीक पहुंच चुका है, वहीं इस वायरस से मरने वालों की संख्या नौ लाख 40 हजार के पार हो गई है। इस वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित अमेरिका में संक्रमितों की संख्या 66.30 लाख है जबकि मरने वालों की संख्या 196,802 हो गई है। भारत दूसरे नंबर पर है और अमेरिका के करीब पहुंच चुका है। यहां अब तक कोरोना वायरस 51.18 लाख लोगों को संक्रमित कर चुका है और 83,198 लोगों की संक्रमण से मौत हो चुकी है। 
क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में कुल 9 वैक्सीन

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फिलहाल 33 कंपनियों के कोरोना वैक्सीन का परीक्षण हो रहा है। इनमें से 9 वैक्सीनों का तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है। इनमें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के साथ-साथ, कैनसाइनो-बीजिंग इंस्टीट्यूट, जेनसेन फार्मास्युटिकल्स, साइनोवैक, सिनोफार्म-वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स, मॉडर्ना और बायोएनटेक-फाइजर की वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल चल रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल पूरे न होने के कारण विवादों में रहने वाली रूस की स्पुतनिक V वैक्सीन के भी पोस्ट रजिस्ट्रेशन क्लिनिकल ट्रायल जारी हैं। ये ट्रायल फिलहाल 40,000 लोगों पर हो रहे हैं। इन 33 वैक्सीन के अलावा 145 और कोरोना वैक्सीन पर भी काम चल रहा है। 

रूसी वैक्सीन को लेकर सवाल

रूस ने पिछले हफ्ते दुनिया का पहला वैक्सीन बनाने का दावा किया था। उसने 11 अगस्त को स्पुतनिक V को मंजूरी दे दी थी, लेकिन तब पश्चिमी देशों से जुड़े विशेषज्ञों ने कम समय में बनाई गई इस वैक्सीन पर ये कहते हुए संदेह जताया कि शोधकर्ताओं ने शायद पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। हालांकि इसके जवाब में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना था कि वैक्सीन ने सभी जरूरी नियमों को पूरा कर लिया है। उन्होंने ये भी दावा किया था कि उनकी एक बेटी को भी ये वैक्सीन दी गई है। 

सितंबर की शुरुआत में इस वैक्सीन को लेकर पहली बार किसी मेडिकल पत्रिका में कोई रिपोर्ट छपी। ‘द लैंसेट’ में एक रिपोर्ट में कहा गया कि वैक्सीन के ट्रायल में हिस्सा लेने वालों में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनी है और उनमें इसका कोई गंभीर साइड-इफेक्ट देखने को नहीं मिला है। लेकिन बीबीसी स्वास्थ्य संवाददाता फिलिपा रॉक्सबी के अनुसार, वैक्सीन का ट्रायल 18 साल से 60 साल की उम्र वालों पर हुआ है, जिन्हें 42 दिनों तक निगरानी में रखा गया। इस कारण ये तो कहा जा सकता है कि वैक्सीन 18 से 60 उम्र वालों को 42 दिनों तक सुरक्षा देगी, लेकिन 42 दिन के बाद क्या ये कारगर साबित होगी? और 60 साल से अधिक उम्र वालों पर इसका क्या प्रभाव होगा? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब मिलना बाकी है।  

लेकिन डॉक्टर रेड्डीज और आरडीआईएफ ने कहा है कि करीब 40,000 लोगों पर अभी इसके ट्रायल किए जा रहे हैं, जिसके प्रारंभिक नतीजे नवंबर से पहले आ जाएंगे। डॉक्टर रेड्डीज ने एक बयान में कहा, ‘स्पुतनिक V के पहले और दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे सकारात्मक रहे हैं। भारतीय लोगों के लिए ये वैक्सीन कारगर हो इसके लिए नियामकों की मंजूरी के बाद इसके तीसरे चरण के ट्रायल भारत में होंगे। उम्मीद है कि कोविड-19 से लड़ने में स्पुतनिक V वैक्सीन कारगर साबित होगी।’ कंपनी के अनुसार समय पर नियामकों की मंजूरी मिलने पर और ट्रायल पूरे होने पर इस साल के आखिर तक इस वैक्सीन की डिलीवरी शुरू हो जाएगी

कहां तक पहुंची ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन

ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही है। वहीं इसके लिए क्लीनिकल ट्रायल भी कर रही है। दुनियाभर में वैक्सीन की पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनी ने इसके लिए दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता भारतीय संस्थान सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ करार किया है। लेकिन, वैक्सीन के ट्रायल में शामिल एक व्यक्ति में कुछ साइड इफेक्ट दिखने के बाद ट्रायल्स पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद भारत में भी इसे रोक दिया गया। 

शनिवार को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इस वैक्सीन के सुरक्षित होने की बात की, जिसके बाद ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में इसके ट्रायल एक बार फिर शुरू हो गए। लेकिन अमेरिका में इसके ट्रायल फिर शुरू नहीं हुए हैं। फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की मंजूरी के बाद इसके ट्रायल को यहां आगे बढ़ाने की इजाजत मिलेगी। इसके बाद बुधवार को एस्ट्राजेनेका ने कहा कि स्वतंत्र समीक्षा के अनुसार जिस साइड इफेक्ट के दिखने की बात हो रही है वो शायद वैक्सीन के कारण नहीं है। 

इधर भारत में मंगलवार को डीसीजीआई ने लोगों को पूरी जानकारी दे कर उनकी सहमति लेने, स्क्रीनिंग के वक्त अधिक सावधानी बरतने और प्रक्रिया की निगरानी करने की शर्त पर सीरम इंस्टीट्यूट को ट्रायल की इजाजत दे दी है। भारत में इस वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल चल रहे हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार, ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की बनाई वैक्सीन अब तक की सबसे उन्नत वैक्सीन है जिसे एस्ट्राजेनेका बड़े पैमाने पर बना रही है। सीरम इंस्टीट्यूट ने कोरोना वायरस की एक और वैक्सीन के एक अरब डोज बनाने के लिए मंगलवार को अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स के बीच हुए करार में बदलाव किए हैं। दोनों के बीच पहले अगस्त में 10 करोड़ डोज बनाने को लेकर समझैता हुआ था, लेकिन अब इसे बढ़ा कर एक अरब कर दिया गया है। फिलहाल इस वैक्सीन के दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं और उम्मीद की जा रही है कि कुछ सप्ताह में इसके तीसरे चरण के ट्रायल शुरू होंगे। 

अमेरिकी चुनाव में चर्चा वैक्सीन की

कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित अमेरिका में वैक्सीन की चर्चा चुनाव का हिस्सा बन रही है। इसी सप्ताह सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन के निदेशक डॉक्टर रॉबर्ट रेडफील्ड ने अमेरिकी सीनेट के सामने कहा कि कोरोना वैक्सीन ही लोगों के लिए उपलब्ध होगी और देश के हर नागरिक को वैक्सीन देने में छह से नौ महीनों का वक्त लगेगा। उन्होंने ये भी कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में मास्क वैक्सीन के मुकाबले अधिक महत्वपूर्ण है। उनके इस बयान से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खासे नाराज हुए, जो पहले ही अपने चुनावी भाषणों में वैक्सीन के जल्द से जल्द उपलब्ध होने की बात कर चुके हैं। 

डॉक्टर रेडफील्ड के बयान के बाद ट्रंप ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘ये सरासर गलत जानकारी है। जैसे ही वैक्सीन उपलब्ध होगी उसे सीधे लोगों तक पहुंचाया जाएगा। किसी भी सूरत में डॉक्टर रेडफील्ड ने जैसा कहा वैक्सीन में उतनी देरी नहीं होगी।’ साथ ही उन्होंने कहा कि डॉक्टर रेडफील्ड ने मास्क के बारे में ‘गलती से कह दिया है। वैक्सीन मास्क से बेहतर है।’ 

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों की रेस में शामिल डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिद्वंदी जो बाइडन ने कोरोना वैक्सीन बनाने को मंजूरी देने के ट्रंप प्रशासन के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है, ‘वैक्सीन के मामले में मैं वैज्ञानिकों पर भरोसा करता हूं, डोनाल्ड ट्रंप पर नहीं।’ जो बाइडेन का कहना है कि वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। 

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